इस अवसर पर पर्यावरण विशेषज्ञों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न क्षेत्रीय प्रतिनिधियों ने भाग लिया और एक जल-सुरक्षित, टिकाऊ भविष्य की दिशा में मिलकर काम करने का संकल्प लिया।

सम्पूर्णा सामाजिक संस्था की ओर से ‘सूखे कुएं, जल निकाय एवं पर्यावरण’ विषय पर शनिवार को विचार गोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। यह विचारगोष्ठी दिल्ली विधानसभा परिसर में आयोजित की गई और इसकी अध्यक्षता माननीय विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुरू किए गए महत्वाकांक्षी जल अभियानों मिशन अमृत सरोवर (हर जिले में 75 जलाशयों का पुनर्जीवन) और जल शक्ति अभियान: कैच द रेन 2025 का उल्लेख करते हुए कहा कि ये अभियान केवल सरकारी योजनाएं नहीं, बल्कि राष्ट्र पुनर्निर्माण का खाका हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब जनता भागीदार बनती है तो सबसे बड़ी चुनौतियां भी अवसर में बदल जाती हैं।
ऐसे विषयों को विधानसभा में भी चर्चा के लिए लाया जाना चाहिए
संजय पोद्दार, प्रदेश अध्यक्ष, अधिवक्ता परिषद ने संबोधित करते हुए कहा कि जब तंत्र और सामाजिक संस्थाएं एकजुट होकर कार्य करती हैं, तो उसके परिणाम अधिक प्रभावी और स्थायी होते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे विषयों को विधानसभा में भी चर्चा के लिए लाया जाना चाहिए। नरेंद्र, भारतीय जैन संघ ने पर्यावरण के प्रति अपने द्वारा किए जा रहे कार्यों एवं सेवा भावना का उल्लेख किया, जिसकी प्रधानमंत्री मोदी ने भी खुले मंच से प्रशंसा की है।
दिल्ली के जल निकायों और कुओं को पुनः जीवित करने की आवश्यकता
खाटूधाम से पधारे डॉ. नरेश ने संरक्षण संबंधी प्रयासों में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। इस दौरान सत्यवती कॉलेज के प्रधानाचार्य हरी मोहन भी मौजूद रहे। इस गोष्ठी में यह निर्णय लिया गया कि दिल्ली के जल निकायों और कुओं को पुनः जीवित करने की आवश्यकता है।
दिल्ली की नई सरकार से बड़ी उम्मीदें
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए सम्पूर्णा संस्थापिका डॉ. शोभा विजेन्द्र ने कहा कि दिल्ली की वॉटरबॉडीज को पुनः जीवित कर हम जल संरक्षण और पर्यावरण में सुधार के सार्थक प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि हमें दिल्ली की नई सरकार से बड़ी उम्मीदें हैं। जल का संरक्षण आवश्यक है। जल अब असीमित नहीं रहा। उन्होंने जागरूक और जिम्मेदार उपभोग की आवश्यकता पर बल देते हुए चेतावनी दी कि यदि हम आज अपनी उपभोग की आदतें नहीं बदलते, तो भविष्य में हमें इसके दूरगामी परिणाम भुगतने पड़ेंगे।
सर्वसम्मति के साथ हुआ संगोष्ठी का समापन
संगोष्ठी का समापन इस सर्वसम्मति के साथ हुआ कि दिल्ली को जल और पर्यावरण संकटों से उबारने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण, समुदाय की भागीदारी और संस्थागत प्रतिबद्धता को एक साथ लाना होगा।



