बुजुर्गों की मजबूत लाठी थे एडवोकेट हरीश उपाध्याय

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अधिवक्ता हरीश कुमार के आकस्मिक निधन होने पर बुजुर्गों एवं कवियों की सामाजिक व साहित्यिक संस्था ने उनके निधन पर गहरा शोक प्रकट करते हुए एक शोक सभा का अयोजन कर उन्हें अश्रुपूर्ण श्रद्धांजली दी।
बुधवार को शोक सभा में साहित्यानंद के संस्थापक बुजुर्ग कवि पंडित रामनिवास उपाध्याय ने कहा कि उम्र के आखिरी पड़ाव पर जीवन व्यतीत करने वाले असहाय और निराश्रित बुजुर्गों के लिए एडवोकेट हरीश कुमार न सिर्फ उनकी मजबूत लाठी के समान थे बल्कि उनकी विषम परिस्थितियों में भी उन्हें जीने का हौसला देने वाले थे। वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश कुमार एडवोकेट ने समाज में जीवन यापन करने वाले वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा और उनके उत्थान के लिए संस्था जनमंच की स्थापना भी की। इसके अलावा बुजुर्गों एवं कवियों की सामाजिक व साहित्यिक संस्था के प्रेरणा स्रोत भी थे। शोक सभा में मौजूद लोगों ने दो मिनट का मौन धारण कर दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिवार के धैर्य धारण हेतु ईश्वर से प्रार्थना की। इस दौरान मुरारी लाल शर्मा मधुर, रविराज सिंह, वीरपाल सिंह वीर, विष्णु कुमार शर्मा, सुनील कुमार शर्मा, वीरेंद्र जैन नारद, विनोद कुमार जैसवाल, एम पी सिंह,रामखिलौनी, डॉ प्रभात कुमार, सत्य प्रकाश शर्मा, शैलेश अवस्थी, रामचरन बघेल, योगेश त्रिवेदी, डॉक्टर कासिम अली, विकास सिंह, जगमोहन सिंह आदि बुजुर्ग कवि एवं पत्रकार मौजूद थे।

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Author: Sunil Kumar

SASNI, HATHRAS

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