रिपोर्टर रजनीश पाण्डेय सूरत गुजरात प्लानेट न्यूज

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अंकलेश्वर जीआईडीसी से 250 करोड़ का ड्रग्स जब्त
दवा की फैक्ट्री से फिर ड्रग्स का नशीला कारोबार

सूरत। अंकलेश्वर जीआईडीसी में फिर एक बार ड्रग्स का जखीखा जब्त हुआ है। सूरत और भरुच पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन में 427 किलो संदिग्ध नशीला पदार्थ बरामद कर जांच के लिए फॉरेंसिंक साइंस लेबोरेट्री भेजा गया है। पुलिस ने 14.10 लाख रुपये का 141 ग्राम ड्रग्स पकड़े जाने की पुष्टि हुई है। बाकी जांच रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट हो पाएगी। इस मामले में पुलिस ने अवसर इंटरप्राइज के संचालक विशाल पटेल समेत अन्य दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। कंपनी के मालिक के विदेश में होने की जानकारी मिली है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार ड्रग्स मामले की जानकारी सर्वप्रथम सूरत के वेलंजा में मिली थी। सूरत क्राइम ब्रांच ने पिछले दिनों 2 करोड़ रुपये कीमत का 2100 ग्राम एमडी ड्रग्स पकड़ा था। मामले में तीन आरोपित भी गिरफ्तार किए गए थे। इन आरोपितों से पूछताछ में पता चला कि वे यह ड्रग्स अंकलेश्वर जीआईडीसी से लाया था। इस जानकारी के आधार पर पुलिस ने अवसर इंटरप्राइजेज में छापेमारी कर ड्रग्स की खेप जब्त की है।

सूरत के पुलिस आयुक्त अनुपम सिंह गेहलोत ने बताया कि शहर क्राइम ब्रांच पिछले कई दिनों से ड्रग्स रैकेट और कार्टेल्स (उत्पादक) समेत ड्रग्स की आपूर्ति करने वालों पर निगरानी रखी थी। इसी के तहत सूरत क्राइम ब्रांच को सफलता मिली है। सूरत ग्रामीण वेलंजा गांव से पकड़े गए तीन लोगों से पूछताछ के दाैरान अंकलेश्वर के नए रैकेट का खुलासा हुआ है। जानकारी के अनुसार इसी महीने 13 अक्टूबर को अंकलेश्वर जीआईडीसी के आवकार दवा की फैक्ट्री से 5
हजार करोड़ रुपये का 518 किलो कोकीन बरामद हुआ था।

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Author: planetnewsindia

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सबसे ज्यादा पड़ गई

संजय भाटिया ने लोकसभा चुनाव में रचा था इतिहास संजय भाटिया कुरुक्षेत्र विश्वविद्याल ग्रेजुएट हैं। इनका जन्म हरियाणा के पानीपत जिले में हुआ है। वह भाजपा के महामंत्री भी रह चुके हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी संजय भाटिया ने अपने पहले ही लोकसभा चुनाव में इतिहास रच दिया था। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को 6.54 लाख मतों के अंतर से मात दी थी। संजय भाटिया ने प्रदेश के 53 साल के इतिहास में सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी। उन्हें कुल 909432 वोट मिले थे। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी कुलदीप शर्मा को 654269 वोटों के अंतर से हराया था। राहुल गांधी ने दिया था कर्मवीर के नाम का सुझाव वहीं कर्मवीर सिंह बौद्ध किसी भी गुट या खेमे से जुड़े हुए नेता नहीं माने जाते। यही कारण है कि उन्हें संगठन के भीतर एक संतुलित और सर्व स्वीकार्य चेहरे के रूप में देखा जा रहा है। वे ‘संविधान बचाओ अभियान’ में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं और जमीनी स्तर पर पार्टी के कार्यक्रमों में भागीदारी निभाते रहे हैं। एससी समुदाय से आने वाले कर्मवीर सिंह बौद्ध सामाजिक संतुलन के नजरिये से भी एक अहम दावेदार है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने स्वयं उनके नाम का सुझाव दिया है। अंबाला के मुलाना विधानसभा में रहने वाले कर्मवीर सिंह प्रशासकीय अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं और लंबे समय से कांग्रेस से जुड़कर कार्य कर रहे थे। कांग्रेस ने उन्हें हिमाचल प्रदेश में एससी सेल का प्रभारी भी बनाया था। राष्ट्रीय स्तर पर वह कन्वीनर भी हैं।