खिलाड़ियों का राजनीति से जुड़ाव हमेशा सीधे चुनाव लड़ने तक सीमित नहीं रहा है। अनेक खिलाड़ी पहले पुलिस, प्रशासन या खेल विभाग में जिम्मेदारियां संभालते थे। यह पृष्ठभूमि बाद में उनके चुनावी राजनीति में प्रवेश का आधार बनी।

पंजाब में खेल और राजनीति का रिश्ता आजादी के बाद से ही गहरा रहा है। राज्य ने ऐसे खिलाड़ी दिए हैं जिन्होंने खेल के बाद सार्वजनिक जीवन और राजनीति में भी पहचान बनाई। पिछले एक दशक में खिलाड़ियों की राजनीतिक भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह बदलाव पंजाब की सियासत को एक नया आयाम दे रहा है।
भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान और पद्मश्री परगट सिंह ने लंबी राजनीतिक पारी खेली है। वह जालंधर छावनी से लगातार विधानसभा चुनाव जीतकर मंत्री भी रहे हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में जालंधर छावनी में परगट सिंह और सुरिंदर सिंह सोढ़ी के बीच टक्कर हुई।
सुरिंदर सिंह सोढ़ी 1980 मॉस्को ओलंपिक की स्वर्ण पदक विजेता टीम के सदस्य थे। वह आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार थे और पंजाब पुलिस में वरिष्ठ अधिकारी भी रहे। बास्केटबॉल खिलाड़ी सज्जन सिंह चीमा ने भी आम आदमी पार्टी से सुल्तानपुर लोधी से चुनाव लड़ा। राजबीर कौर, भारतीय महिला हॉकी की पूर्व कप्तान और ‘गोल्डन गर्ल’, भी आम आदमी पार्टी से जुड़ीं।
क्रिकेट और कुश्ती के सितारे
क्रिकेट में नवजोत सिंह सिद्धू का नाम सबसे चर्चित रहा है। वह अमृतसर से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे और पंजाब सरकार में मंत्री भी रहे। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व गेंदबाज हरभजन सिंह को 2022 में आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा भेजा। पद्मश्री और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित पहलवान करतार सिंह ने भी राजनीति में कदम रखा। उन्होंने आम आदमी पार्टी के साथ राजनीतिक सफर शुरू किया और विधानसभा चुनाव लड़ा। अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी गुरलाल सिंह घनौर 2022 में घनौर से विधायक बने। वह पंजाब की ग्रामीण खेल संस्कृति से विधानसभा तक पहुंचे हैं।
खिलाड़ियों के राजनीति में आने के कारण
पहलवान जसकंवर सिंह उर्फ जस्सा पट्टी को जुलाई 2026 में आम आदमी पार्टी ने पट्टी विधानसभा हलके का प्रभारी नियुक्त किया। यह खिलाड़ियों के राजनीति में आने की नई कड़ी है। पंजाब में खेलों की सामाजिक प्रतिष्ठा बहुत मजबूत है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर चुके खिलाड़ियों की सार्वजनिक पहचान पहले से बनी होती है। खेलों से जुड़े अनुशासन और प्रतिस्पर्धा की पृष्ठभूमि उन्हें सार्वजनिक जीवन में अलग पहचान देती है। खिलाड़ियों की लोकप्रियता राजनीतिक दलों के लिए युवा पीढ़ी से जुड़ने का माध्यम बन सकती है। हालांकि खेल की लोकप्रियता चुनावी सफलता की गारंटी नहीं होती, कई खिलाड़ी चुनाव हार भी चुके हैं।