चुन्नी लाल भगत के निधन के साथ जालंधर की राजनीति में एक लंबे दौर का अंत हुआ है। पाकिस्तान से विस्थापन के बाद जालंधर को अपनी कर्मभूमि बनाकर कारोबार से सार्वजनिक जीवन और फिर विधानसभा तथा पंजाब सरकार तक पहुंचने वाली उनकी यात्रा आने वाली पीढ़ियों के लिए राजनीतिक संघर्ष और मेहनत की कहानी बनी रहेगी।
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पंजाब के वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री चुन्नी लाल भगत का निधन हो गया। उनके निधन की खबर से जालंधर की राजनीति और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
इसके बाद भाजपा के साथ उनका राजनीतिक जुड़ाव मजबूत होता गया। पार्टी संगठन में सक्रिय रहते हुए उन्होंने जालंधर में अपना जनाधार तैयार किया। इसका परिणाम वर्ष 1997 में सामने आया, जब उन्होंने भाजपा के टिकट पर जालंधर दक्षिण विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर पहली बार पंजाब विधानसभा में प्रवेश किया। यह उनके राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव था। इसके बाद वर्ष 2007 में उन्होंने इसी सीट से दोबारा जीत दर्ज की और विधानसभा में अपनी स्थिति मजबूत की।
विधानसभा परिसीमन के बाद जालंधर दक्षिण सीट के स्वरूप में बदलाव हुआ। वर्ष 2012 में चुन्नी लाल भगत ने जालंधर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और यहां से भी जीत दर्ज की। लगातार चुनावी सफलताओं ने उन्हें जालंधर ही नहीं, बल्कि पंजाब भाजपा के प्रमुख नेताओं की कतार में ला खड़ा किया।
उनके राजनीतिक कद का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2011 में उन्हें पंजाब विधानसभा का उपाध्यक्ष चुना गया। इसके बाद वर्ष 2012 में भाजपा विधायक दल के नेता की जिम्मेदारी भी उन्हें मिली। यह उनके लिए पार्टी और विधानसभा के भीतर बढ़ते राजनीतिक प्रभाव का संकेत था।
बादल सरकार में बने मंत्री
वर्ष 2012 में प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व में अकाली-भाजपा गठबंधन की सरकार बनी तो चुन्नी लाल भगत को कैबिनेट मंत्री बनाया गया। सरकार में उन्हें महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी मिली। उन्होंने स्थानीय निकाय तथा चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान जैसे विभाग संभाले। बाद में उनके पास वन एवं वन्यजीव संरक्षण तथा श्रम जैसे विभागों की जिम्मेदारी भी रही।