गुरमीत सिंह वर्ष 1992 में अस्थायी वीजा पर अमेरिका गया था। इसके बाद वर्ष 2000 में उसे स्थायी निवास यानी पीआर मिल गया। अमेरिका में वह टैक्सी चालक के तौर पर काम कर रहा था।

अमेरिका की ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ न्यूयॉर्क की संघीय अदालत ने भारतीय मूल के नागरिक गुरमीत सिंह की अमेरिकी नागरिकता रद्द करने का आदेश दिया है। अदालत का यह फैसला उस मामले में आया है, जिसमें गुरमीत सिंह को दुष्कर्म और अपहरण जैसे गंभीर अपराधों में दोषी ठहराया गया था। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, उसने अमेरिकी नागरिकता हासिल करने की प्रक्रिया के दौरान अपने गंभीर आपराधिक कृत्य को छिपाया था।
जानकारी के अनुसार, गुरमीत सिंह वर्ष 1992 में अस्थायी वीजा पर अमेरिका गया था। इसके बाद वर्ष 2000 में उसे स्थायी निवास यानी पीआर मिल गया। अमेरिका में रहने के दौरान वह टैक्सी चालक के तौर पर काम कर रहा था।
मामले के अनुसार, मई 2011 में, अमेरिकी नागरिकता के लिए आवेदन करने से कुछ ही सप्ताह पहले, गुरमीत सिंह पर एक महिला यात्री के साथ दुष्कर्म करने और उसका अपहरण करने का आरोप लगा। अभियोजन पक्ष के अनुसार, उसने टैक्सी में सवार महिला के साथ गंभीर अपराध किया और उसे उसकी इच्छा के विरुद्ध अपने कब्जे में रखा।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इस गंभीर अपराध के बावजूद गुरमीत सिंह ने नागरिकता हासिल करने की प्रक्रिया के दौरान अपने खिलाफ दर्ज मामले और अपने आपराधिक आचरण का खुलासा नहीं किया। इसके बाद अक्टूबर 2011 में उसे अमेरिकी नागरिकता प्रदान कर दी गई।
हालांकि, बाद में उसके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला आगे बढ़ा और न्यूयॉर्क की अदालत में उसे पहले दर्जे के दुष्कर्म और अपहरण के आरोपों में दोषी ठहराया गया। अदालत ने इन गंभीर अपराधों के लिए उसे 20 वर्ष की जेल की सजा सुनाई।
अब नागरिकता प्राप्त करने की प्रक्रिया में कथित तौर पर अपराध छिपाने का मामला सामने आने के बाद अमेरिकी सरकार ने उसकी नागरिकता रद्द करने के लिए कानूनी कार्रवाई की। संघीय अदालत के फैसले के बाद गुरमीत सिंह की अमेरिकी नागरिकता समाप्त हो गई है।
इस मामले को अमेरिकी प्रशासन ने नागरिकता हासिल करने की प्रक्रिया में सही और पूरी जानकारी देने की अनिवार्यता से जोड़कर देखा है। अधिकारियों का कहना है कि प्राकृतिककरण के लिए आवेदन करने वाला व्यक्ति यदि अपने आपराधिक रिकॉर्ड या अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों को जानबूझकर छिपाता है और इसी आधार पर नागरिकता हासिल कर लेता है, तो बाद में उस नागरिकता को कानूनी प्रक्रिया के तहत चुनौती दी जा सकती है।
