संत लोंगोवाल ने पंजाब में अमन-शांति के लिए शहादत दी थी। उन्हें 20 अगस्त, 1985 को संगरूर के शेरपुर में शहीद कर दिया गया था। उन्होंने पंजाब की शांति व तरक्की के लिए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से समझौता किया था।

पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मालवा के लोंगोवाल में आज पंथक सियासत का बड़ा शक्ति प्रदर्शन होगा। शहीद संत हरचंद सिंह लोंगोवाल की बरसी पर अकाली राजनीति के दोनों धड़े अपनी ताकत दिखाएंगे।
शिरोमणि अकाली दल (बादल) और अकाली दल (पुनरसुरजीत) खुद को संत लोंगोवाल की विरासत का असली वारिस साबित करने की होड़ में हैं।
यह समागम पंजाब की आने वाली चुनावी राजनीति की दिशा तय करने में निर्णायक साबित होगा। दोनों दल अपने मुख्य मतदाताओं को एकजुट करने और मालवा क्षेत्र में संगठन का आधार बचाने का प्रयास कर रहे हैं।
बरसी के समागम स्थल को लेकर दोनों दलों में विवाद उच्च न्यायालय तक पहुंच गया है। प्रशासन ने अनाज मंडी का ढका हुआ शेड पुनर्सुरजीत दल को दिया है। वहीं, खुला मैदान बादल दल को आवंटित किया गया है। शिरोमणि अकाली दल ने आम आदमी पार्टी सरकार पर पक्षपात का आरोप लगाया है। पार्टी नेता विन्नरजीत सिंह गोल्डी ने कहा कि शिअद ने अप्रैल में ही शुल्क जमा करवाकर शेड आरक्षित कराया था।
मार्केट कमेटी और जिला प्रशासन ने इस पर स्पष्टीकरण दिया है। उनका कहना है कि पुनर्सुरजीत दल श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के स्वरूप को सुशोभित कर समागम कर रहा है। इसके लिए ढका हुआ स्थान आवश्यक था। दोनों धड़ों को एक ही मंडी के दो अलग हिस्सों में जगह दी गई है। प्रशासन ने किसी भी तरह की सियासत या पक्षपात से इन्कार किया है। पुनर्सुरजीत दल के हरप्रीत सिंह, परमिंदर सिंह ढींडसा, गोविंद सिंह लोंगोवाल और प्रेम सिंह चंदूमाजरा, संत लोंगोवाल के पंथक एजेंडे को ढाल बनाकर सुखबीर सिंह बादल को घेरने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
