अध्ययन से पता चला है कि बचत करने की इच्छा और आदत में व्यक्तिगत बचत मापदंडों का खास महत्व है। शख्सियत के लक्षण भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि सिर्फ आज में जीने की आदत से बचत करने की आदत कम होती है।

पटियाला की पंजाबी यूनिवर्सिटी के एक हालिया शोध में यह सामने आया है कि सिर्फ आज में जीने की आदत लोगों की बचत करने की प्रवृत्ति को कम करती है। इस अध्ययन में मौजूदा आर्थिक दौर में बचत के संकल्पों और वित्तीय संस्थाओं की भूमिका पर विशेष पड़ताल की गई है।
संदीप सिंह विरदी ने बताया कि अध्ययन से पता चला है कि बचत करने की इच्छा और आदत में व्यक्तिगत बचत मापदंडों का खास महत्व है। शख्सियत के लक्षण भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि सिर्फ आज में जीने की आदत से बचत करने की आदत कम होती है। इसके अलावा, आय का स्तर, काम और परिवार में निर्भर लोगों की संख्या भी सीधे तौर पर बचत व्यवहार पर असर डालती है। हालांकि, उम्र और लिंग का बचत के फैसलों पर कोई असर नहीं पड़ता है। ये बेअसर कारक पाए गए हैं।
शोध में यह भी सुझाव दिया गया है कि जो लोग आज में जीना पसंद करते हैं, उन्हें भविष्य की आपात स्थितियों के लिए बचत करने के लिए बढ़ावा दिया जाना चाहिए। वित्तीय संस्थाओं को ऐसे ग्राहकों के लिए इनाम और नियमित सेवाओं जैसी स्कीमें लानी चाहिए। यह उन्हें दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा के लिए प्रेरित करेगा। कुलपति जगदीप सिंह ने शोध टीम को उनकी कड़ी मेहनत के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह शोध अपनी बचत की आदतों को मजबूत करने के इच्छुक लोगों और वित्तीय संस्थाओं को व्यावहारिक जानकारी के आधार पर नई स्कीमें तैयार करने के लिए एक व्यावहारिक ढांचा प्रदान करता है।
