राजधानी में अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के 32 दिन बाद अवैध चार मंजिला इमारत को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू हुई। भारी पुलिस बल और मशीनों की मौजूदगी में भवन गिराया जा रहा है। जांच में भवन का आवासीय स्वीकृति के बावजूद व्यावसायिक उपयोग और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि हुई थी।
अलीगंज अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के 32 दिन बाद शनिवार को लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने अवैध चार मंजिला इमारत को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी। सुबह करीब 7:30 बजे एलडीए के 45 अधिकारी और कर्मचारी तीन बुलडोजर व एक हाइड्रोलिक मशीन के साथ मौके पर पहुंचे। कार्रवाई के दौरान आसपास की सड़कों पर बैरिकेडिंग कर यातायात रोक दिया गया और सुरक्षा व्यवस्था के लिए 100 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए।
एलडीए के अनुसार, पूरी इमारत को जमींदोज करने में पूरे दिन का समय लग सकता है। ध्वस्तीकरण के दौरान भवन मालिक वीरेंद्र शुक्ला के अधिवक्ता राजेंद्र शुक्ला मौके पर पहुंचे और कार्रवाई पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि एलडीए ने 25 जुलाई तक का समय दिया था, लेकिन उसी दिन बिना अलग ध्वस्तीकरण आदेश जारी किए कार्रवाई शुरू कर दी गई। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई को अदालत में चुनौती दी जाएगी।
22 जून को हुई 15 लोगों की मौत
गौरतलब है कि 22 जून को इस इमारत की दूसरी मंजिल पर संचालित एनिमेशन कोचिंग सेंटर में भीषण आग लगने से 15 लोगों की जलकर मौत हो गई थी। हादसे में पांच लोगों ने पाइप और तारों के सहारे नीचे उतरकर जान बचाई थी, जबकि एक युवक दूसरी मंजिल से कूद गया था, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
जांच में सामने आया था कि आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत भवन का व्यावसायिक इस्तेमाल किया जा रहा था और निर्माण भी नियमों के विपरीत था। इसके बाद एलडीए ने भवन मालिक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। 10 जुलाई को ध्वस्तीकरण का आदेश जारी करते हुए 15 दिन के भीतर स्वयं इमारत गिराने के निर्देश दिए गए थे। निर्धारित समयसीमा समाप्त होने के बाद एलडीए ने शनिवार को स्वयं बुलडोजर चलाकर कार्रवाई शुरू कर दी।
