राजधानी लखनऊ से अयोध्या के बीच चलने वाली इकलौती डबलडेकर बस सेवा बंद हो गई है। ज्यादा सुविधाएं और कम किराये के बावजूद इसे यात्री नहीं मिल रहे थे। स्पीड कम होने के कारण तीन से चार घंटे में बस अयोध्या पहुंच रही थी। आगे पढ़ें पूरी खबर…

राजधानी लखनऊ से अयोध्या के बीच चलने वाली इकलौती डबलडेकर बस सेवा बंद हो गई है। किराया कम होने के बावजूद बस को यात्री नहीं मिल रहे थे। अफसर बताते हैं कि बस की स्पीड कम होने के कारण इसे अयोध्या पहुंचने में चार घंटे तक लग रहे थे। इसकी वजह से यात्रियों ने बस से किनारा कर लिया।
इस कारण बस सेवा को बंद किया गया
अधिकारियों ने बताया कि डबलडेकर बस की अधिकतम स्पीड 50 किमी प्रति घंटे है। भीड़भाड़ के कारण बस औसतन 40 से 45 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से ही चल पा रही थी। अयोध्या तक 140 किमी की दूरी तय करने में बस को तीन से चार घंटे लग रहे थे। रोडवेज की अन्य बसें दो से ढाई घंटे में ही अयोध्या पहुंचती हैं। यात्रियों की कमी से बस का खर्च निकालना मुश्किल हो गया था। इसी कारण इस बस सेवा को बंद किया गया है।
सुविधाओं से भरपूर थी डबलडेकर बस
डबलडेकर बस में एयरकंडीशन के साथ-साथ आरामदायक कुर्सियां हैं। बस की कुल सीटिंग क्षमता 64 है, जिसमें 35 ऊपर व 29 सीटें नीचे हैं। सेफ्टी व सिक्योरिटी के भी अच्छे इंतजाम हैं। इस बस की बैलेंसिंग अन्य से काफी बेहतर है। इसके बावजूद यात्रा में देरी ने इस बस से यात्रियों का मोहभंग कर दिया।
ऐसे लौट सकती है डबलडेकर की रौनक
डबलडेकर बसों की रौनक लौटाने के लिए अफसरों ने मंथन शुरू कर दिया है। इसमें बसों की स्पीड लिमिट 50 से बढ़ाकर 65 किमी प्रतिघंटे तक करने पर विचार हो रहा है। इन बसों को 50 से 80 किमी दूरी वाले रूट पर चलाने के लिए भी मंथन हो रहा है। इससे यात्रियों को राहत भी मिलेगी और रोडवेज का राजस्व भी प्रभावित नहीं होगा।
किराया कम, फिर भी यात्रियों ने किया किनारा
| बस | किराया | सीटें | स्पीड लिमिट |
| साधारण | 194 रुपये | 52 | 80-90 किमी/घंटे |
| एसी जनरथ | 242 रुपये | 55 | 90-100 किमी/घंटे |
| डबलडेकर | 212 रुपये | 64 | 50 किमी/घंटे |
रोडवेज क्षेत्रीय प्रबंधक विमल राजन ने बताया कि लखनऊ से अयोध्या के बीच चलने वाली डबलडेकर बस सेवा बंद कर दी गई है। इन बसों को अयोध्या पहुंचने में अधिक समय लग रहा था। इससे यात्री नहीं मिल रहे थे और खर्च नहीं निकल पा रहा था। अभी छह बसें बाराबंकी डिपो में खड़ी हैं। इन बसों को चलाने के लिए नए सिरे से मंथन हो रहा है।