पोक्सो एक्ट में सजा पर HC का फैसला: दुष्कर्म में नाबालिग पीड़ित की उम्र जितनी कम, दोषी को सजा उतनी अधिक

Picture of Farheen

Farheen

SHARE:

लुधियाना में 4 साल 7 महीने की बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या से जुड़ा है। आरोपी 28 वर्षीय सोनू सिंह ने बच्ची को उसके दादा की चाय की दुकान से बहला-फुसलाकर ले जाकर यह जघन्य अपराध किया था। इसी मामले में हाईकोर्ट ने यह फैसला दिया है।

Highcourt Verdict on Sentencing under POCSO Act Younger Minor Victim of misdeed Harsher Punishment for Convict

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में बच्चों के साथ यौन अपराध मामलों में सजा तय करने के लिए एक नया मानक प्रस्तुत किया है। कोर्ट ने कहा कि पीड़ित की उम्र जितनी कम होगी, अपराध की सजा उतनी अधिक होनी चाहिए। साथ ही, अपराधियों की संख्या बढ़ने पर सजा और कठोर होगी।

मामला लुधियाना में 4 साल 7 महीने की बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या से जुड़ा है। आरोपी 28 वर्षीय सोनू सिंह ने बच्ची को उसके दादा की चाय की दुकान से बहला-फुसलाकर ले जाकर यह जघन्य अपराध किया था। ट्रायल कोर्ट ने उसे दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। मामला हाईकोर्ट में मौत की सजा की पुष्टि और आरोपी की अपील के रूप में पहुंचा।

जस्टिस अनूप चितकारा और जस्टिस सुखविंदर कौर की खंडपीठ ने कहा कि भारत में पोक्सो मामलों में सजा तय करने के स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं हैं जिससे फैसलों में असंगति आती है। इसी कमी को दूर करने के लिए कोर्ट ने मानक तैयार किया। इसके तहत सजा तय करने का आधार सहमति की कानूनी उम्र को माना जाएगा। जैसे-जैसे पीड़ित की उम्र इस आधार से कम होती जाएगी, सजा बढ़ती जाएगी। यदि अपराध में एक से अधिक आरोपी हों, तो सजा और कठोर होगी।

कोर्ट ने पाया कि पीड़िता की उम्र 5 साल से कम थी और आरोपी अकेला था। इस आधार पर दुष्कर्म के लिए 25 साल का कठोर कारावास को कोर्ट ने उचित माना। हत्या के लिए आजीवन कारावास दिया गया जिसमें कम से कम 50 साल तक बिना किसी रिमिशन के जेल में रहना अनिवार्य होगा। हाईकोर्ट ने सबूतों के आधार पर दोषसिद्धि बरकरार रखी लेकिन यह भी कहा कि हत्या पूर्वनियोजित नहीं थी बल्कि दुष्कर्म के सबूत मिटाने के लिए घबराहट में की गई थी। इसी आधार पर इसे रेयरेस्ट ऑफ रेयर की श्रेणी में न रखते हुए मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया।

Farheen
Author: Farheen

सबसे ज्यादा पड़ गई