राजस्थान में आज से बदलेगा मौसम, आंधी-बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट

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राजस्थान में आज से मजबूत वेदर सिस्टम सक्रिय, कई जिलों में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट। 7 अप्रैल को असर चरम पर, 9 अप्रैल से मौसम फिर शुष्क होगा।

Rajasthan Weather Update: राजस्थान में आज से बदलेगा मौसम, आंधी-बारिश और  ओलावृष्टि का अलर्ट

Rajasthan Weather Update: राजस्थान में सोमवार से एक नया मजबूत वेदर सिस्टम सक्रिय हो रहा है, जिसके असर से प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम अचानक बदलने वाला है। मौसम विभाग ने सोमवार और मंगलवार के लिए तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि को लेकर ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। करीब 14 जिलों में खराब मौसम की चेतावनी दी गई है।

पिछले कुछ दिनों से जारी आंधी-बारिश का दौर रविवार को कमजोर पड़ गया। उदयपुर और कोटा संभाग के कुछ इलाकों में हल्के बादल जरूर नजर आए, लेकिन अधिकांश प्रदेश में मौसम शुष्क रहा और तेज धूप खिली। साफ मौसम के चलते कई शहरों में तापमान में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी दर्ज की गई। जयपुर में रविवार शाम को अचानक घने बादल छा गए, जिससे दिनभर की गर्मी के बाद मौसम सुहावना हो गया। ठंडी हवाओं ने लोगों को राहत पहुंचाई।

पिछले 24 घंटों के तापमान पर नजर डालें तो बाड़मेर सबसे गर्म रहा, जहां अधिकतम तापमान 35.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। इसके अलावा कोटा में 34, जोधपुर में 33.3, डूंगरपुर में 33.3, जैसलमेर में 32.9 और दौसा में 32.8 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। रविवार को कोटा और उदयपुर संभाग में सुबह से दोपहर तक बादल छाए रहे, लेकिन बाद में मौसम साफ हो गया। वहीं, शाम के समय जालोर, सिरोही और बाड़मेर में हल्के बादल जरूर दिखाई दिए, हालांकि बारिश नहीं हुई।

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मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के अनुसार, 6 अप्रैल से सक्रिय हो रहा यह सिस्टम दोपहर बाद पश्चिमी राजस्थान-जैसलमेर, जोधपुर, बाड़मेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर- में असर दिखाना शुरू करेगा। यहां आंधी के साथ बारिश और कुछ जगहों पर ओलावृष्टि होने की संभावना है। इस वेदर सिस्टम का सबसे ज्यादा प्रभाव 7 अप्रैल को देखने को मिलेगा, जब लगभग पूरे प्रदेश में बादल छाने और अधिकांश क्षेत्रों में बारिश होने की संभावना है। 9 अप्रैल के बाद सिस्टम कमजोर पड़ जाएगा और प्रदेश में मौसम फिर से शुष्क हो जाएगा।

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गेहूं-चना की खड़ी फसलें बर्बाद

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मार्च और अप्रैल में इस तरह के लगातार और तीव्र वेस्टर्न डिस्टर्बेंस असामान्य हैं। आमतौर पर ये सिस्टम उत्तर भारत तक सीमित रहते हैं, लेकिन इस बार अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से मिल रही नमी के कारण उत्तर-पश्चिमी मैदानी इलाकों में व्यापक असर देखने को मिल रहा है।
इससे पहले 3 अप्रैल को आए वेस्टर्न डिस्टर्बेंस ने भी प्रदेश के 10 से अधिक जिलों में किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया था। ओलावृष्टि से गेहूं और चना जैसी खड़ी फसलें बर्बाद हो गईं। जोधपुर जिले के बालेसर और आसपास के गांवों में खेतों में फसलें पूरी तरह गिर गईं।
दौसा जिले में लगातार दो दिन तक ओले गिरने से कई गांवों में फसलें खराब हो गईं। टमाटर सहित सब्जी और फल की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। इसके अलावा करौली और चूरू जिलों में भी ओलावृष्टि और तेज हवाओं से सौंफ, गेहूं, इसबगोल और मेथी की फसलें प्रभावित हुई हैं। खड़ी फसलें खेतों में गिर गईं, वहीं कटी हुई फसल भीगकर खराब हो गई, जिससे रबी सीजन में किसानों की चिंता बढ़ गई है।

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Author: Farheen

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