आरोपी ने एक महिला से शादी का प्रस्ताव रखकर करीब चार लाख रुपये ठग लिए। इसके अलावा वह कई लोगों को सेना में नौकरी दिलाने का झांसा देकर भी ठगी करने का आरोपी है।एफआईआर जून 2025 में चंडीगढ़ के क्राइम ब्रांच थाने में दर्ज की गई थी, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया था।

अदालत ने कहा कि आरोपी का रिकॉर्ड यह दर्शाता है कि वह इसी तरीके से लोगों को धोखा देने का आदी है, इसलिए उसे राहत देना उचित नहीं होगा।
जस्टिस मंदीप पन्नू आरोपी गणेश उर्फ गणेश भट्ट की नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। भट्ट पर आरोप है कि उसने खुद को भारतीय सेना का मेजर बताकर नौकरी दिलाने और शादी का झांसा देकर लोगों से पैसे ठगे। एफआईआर के अनुसार आरोपी ने एक महिला से शादी का प्रस्ताव रखकर करीब चार लाख रुपये ठग लिए। इसके अलावा वह कई लोगों को सेना में नौकरी दिलाने का झांसा देकर भी ठगी करने का आरोपी है।
एफआईआर जून 2025 में चंडीगढ़ के क्राइम ब्रांच थाने में दर्ज की गई थी, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान पुलिस ने उसके खिलाफ धोखाधड़ी, प्रतिरूपण (इम्पर्सोनेशन) और सबूत नष्ट करने से जुड़े आरोप भी लगाए हैं।
हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड से प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट होता है कि आरोपी पहले भी इसी तरह सेना अधिकारी बनकर लोगों को ठगने की कोशिश करता रहा है। अपराध की प्रकृति, वारदात का तरीका और जांच में सामने आए तथ्यों को देखते हुए अदालत ने कहा कि वह नियमित जमानत का हकदार नहीं है। अदालत ने इन टिप्पणियों के साथ आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी।