Bundi News: फूल सागर तालाब के अवैध भराव को लेकर बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई की मांग, ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन

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फूल सागर तालाब को अवैध तरीके से भरकर प्राकृतिक जलस्रोत को नुकसान पहुंचाने के आरोपों के बीच बोरखंडी और रामपुरिया गांव के ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया है। इसी को लेकर ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा।

Bundi News: Villagers Protest Demanding Action Against Builder Over Illegal  Filling Of Phool Sagar Pond - Rajasthan News - Bundi News:फूल सागर तालाब के  अवैध भराव को लेकर बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई

जिले के हिंडोली तहसील में अवैध रूप से पेटा कास्त भूमि की खुदाई कर डंपरों के जरिए फूल सागर तालाब को भरने और प्राकृतिक जल स्रोत को नष्ट करने के विरोध में बोरखंडी और रामपुरिया गांव के ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर कार्यालय पर प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि हिंडोली तहसील के रामपुरिया एवं बोरखंडी क्षेत्र में स्थित फूल सागर पैलेस ऐतिहासिक धरोहर है। इसके पास स्थित फूल सागर तालाब में सालभर पानी रहता है, जिससे आसपास की कृषि भूमि की सिंचाई होती है। इस तालाब पर देसी और विदेशी पक्षियों का जमावड़ा भी लगा रहता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि सिंफोनिया कंपनी के डायरेक्टर अक्षय हाडा ने ग्राम रामपुरिया में 7770 वर्गफीट भूमि खरीदकर होटल और रिसॉर्ट निर्माण के लिए भूमि उपयोग परिवर्तन कराया है। होटल निर्माण के लिए हाडा तालाब की पेटा कास्त भूमि और आसपास की जमीन से जेसीबी मशीनों द्वारा मिट्टी की खुदाई कराई जा रही है और फूल सागर तालाब में डाली जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार पिछले 15 से 20 दिनों से यह कार्य लगातार चल रहा है, जिसमें प्रतिदिन 10 से 15 डंपर लगाए जा रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि विरोध करने पर उन्हें जान से मारने और झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकियां दी जा रही हैं। आरोप है कि उन्हें यह भी कहा जा रहा है कि प्रशासन और पुलिस उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकती।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित व्यक्ति ने राजस्व और पुलिस प्रशासन के कुछ कर्मचारियों को अपने प्रभाव में ले रखा है, जिससे पटवारी, कानूनगो, तहसीलदार और उपखंड अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं और उनकी मिलीभगत से अवैध कार्य जारी है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो वे उग्र आंदोलन करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला और पुलिस प्रशासन की होगी।

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