साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत के मामले में इंजेक्शन लगाने वाले नर्सिंग ऑफिसर ने मीडिया के सामने अपनी भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा है कि उन्होंने डॉक्टर की पर्ची के अनुसार ही उपचार किया था।

जोधपुर में साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत के मामले में अब तक मृत्यु का स्पष्ट कारण सामने नहीं आ सका है। इस बीच उन्हें इंजेक्शन लगाने वाले नर्सिंग ऑफिसर देवी सिंह राजपुरोहित ने मीडिया से बातचीत में अपनी भूमिका को लेकर सफाई दी है।
देवी सिंह राजपुरोहित, जो मथुरादास माथुर हॉस्पिटल में नर्सिंग ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं, ने बताया कि घटना वाले दिन उन्हें आश्रम से कॉल आया था। उनके अनुसार पहला कॉल दोपहर करीब 12 बजे आया, लेकिन वे उस समय नहीं जा सके। शाम करीब 5 बजे दोबारा कॉल आने पर वे आश्रम पहुंचे। उन्होंने कहा कि साध्वी प्रेम बाईसा को सांस लेने में दिक्कत बताई गई थी।
राजपुरोहित ने दावा किया कि उन्होंने डॉक्टर की लिखी पर्ची के आधार पर ही दो इंजेक्शन लगाए थे। उन्होंने कहा कि मैंने अपनी मर्जी से कोई इंजेक्शन नहीं लगाया। प्रेक्षा हॉस्पिटल की पुरानी पर्ची पर जो इंजेक्शन लिखे थे, वही दिए। उन्होंने यह भी बताया कि वे पिछले करीब एक साल से सेवा भाव से आश्रम से जुड़े थे और पहले भी दो बार डॉक्टर की सलाह पर साध्वी को दवाइयां दे चुके थे।
उनके अनुसार इंजेक्शन लगाने के समय साध्वी की हालत ठीक थी और इंजेक्शन देने के बाद वे आश्रम से निकल गए थे। करीब 25 मिनट बाद उन्हें फिर कॉल आया कि साध्वी की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई है और उन्हें अस्पताल ले जाया जा रहा है। इस पर उन्होंने परिजनों को सलाह दी कि डॉक्टर को प्रिस्क्रिप्शन और दिए गए इंजेक्शनों की जानकारी दे दें।
देवी सिंह ने यह भी कहा कि जिन इंजेक्शनों का इस्तेमाल किया गया, उनसे सामान्य तौर पर मौत होना संभव नहीं माना जाता। हालांकि चिकित्सकीय और फोरेंसिक जांच के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो पाएगा। फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कॉज ऑफ डेथ स्पष्ट नहीं होने के कारण विसरा जांच कराई जा रही है, जिससे मामले की गुत्थी सुलझने की उम्मीद है।
