पंजाब में सड़क पर लापरवाही: नेशनल हाईवे पर हर आठ घंटे में हो रहा एक हादसा, 75 फीसदी लोग गंवा रहे जान

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वर्ष 2025 में एनएच पर 1111 सड़क हादसे हुए जिसमें 858 लोगों की जान चली गई। पिछले कुछ साल में केंद्र और राज्य सरकार ने दुर्घटना संभावित क्षेत्रों का पता लगाकर हादसों को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं।

Road recklessness in Punjab One accident occurring every eight hours on national highway

पंजाब में नेशनल हाईवे (एनएच) पर हर आठ घंटे में एक हादसा हो रहा है जिसमें 75 फीसदी लोग जान गंवा रहे हैं। सड़क पर लापरवाही भारी पड़ रही है जिसके चलते हादसे रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। खासकर सर्दी के मौसम में धुंध के दौरान हादसे होने का खतरा और बढ़ जाता है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है जिसे वीरवार को संसद में पेश किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में एनएच पर 1111 सड़क हादसे हुए जिसमें 858 लोगों की जान चली गई। पिछले कुछ साल में केंद्र और राज्य सरकार ने दुर्घटना संभावित क्षेत्रों का पता लगाकर हादसों को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं। इससे हादसों में कमी जरूरी आई है लेकिन अभी भी मौतों की दर चिंताजनक है।

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में 1912 हादसे हुए जिसमें 1562 लोगों को जान गंवानी पड़ी। इसी तरह वर्ष 2023 में 2388 हादसों में 1895 और वर्ष 2022 के दौरान 2293 हादसों में 1881 लोगों की मौत हो गई। वर्ष 2021 में 2288 हादसों में 1950 लोगों की जान चली गई। रिपोर्ट के अनुसार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सड़क दुर्घटना आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि सड़क दुर्घटनाओं के कई कारण हैं। इनमें प्रमुख रूप से मानव त्रुटि, सड़क की स्थिति, पर्यावरण और वाहनों की स्थिति शामिल है।

केंद्र ने चार लेन और उससे अधिक चौड़ाई वाले सभी राष्ट्रीय राजमार्गों पर चरणबद्ध तरीके से सभी राज्यों में एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू करने का निर्णय लिया है ताकि सभी राज्यों के लिए ही यातायात प्रबंधन के लिए एक प्रणाली लागू हो और सड़क हादसों में कमी लाने का प्रयास किया जा सके।

पड़ोसी राज्यों की यह है स्थिति

पड़ोसी राज्यों में भी सड़क हादसों की स्थिति चिंताजनक है। हरियाणा में वर्ष 2025 के दौरान एनएच पर 4641 हादसे हुए जिसमें 1885 लोगों को जान गंवानी पड़ी है। इसी तरह हिमाचल प्रदेश में 893 हादसे हुए हैं जिसमें 291 लोगों की जान चली गई जबकि जम्मू एंड कश्मीर में 181 हादसे 416 लोगों की मौत का कारण बने हैं। राजस्थान में आंकड़ें और भी परेशान करने वाले हैं जहां 6686 हादसों में 4255 लोगों की मौत हुई है।

ट्रैफिक नियमों की अनदेखी व तेज रफ्तार बड़ी वजह

विशेषज्ञ के अनुसार वाहन चालकों की ओर से ट्रैफिक नियमों की अनदेखी, तेज रफ्तार, ओवरलोडिंग और व्यावसायिक वाहनों की निगरानी कमजोर होना इसके प्रमुख कारण हैं। प्रदेश में ओवरलोडिंग के चलते पांच साल में 2,725 लोगों की जान गई है जो आम यातायात व्यवस्था पर सवाल उठाने के लिए काफी है। राज्य सरकार ने सड़क हादसों में कमी लाने और समय पर चिकित्सा सहायता पहुंचाने के उद्देश्य से सुरक्षा फोर्स की शुरुआत की है। यह विशेष फोर्स अब राज्य की 4100 किलोमीटर लंबी सड़कों पर हर 30 किलोमीटर पर तैनात है। और हादसे जो सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचकर प्राथमिक उपचार और अस्पताल पहुंचाने का काम कर रही है। राज्य सरकार का दावा है कि फोर्स के गठन के बाद से मौतों की दर पहले से कम हुई है।

 

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Author: NIMRA SALEEM