Operation Cyber Mukti:राजस्थान में साइबर फ्रॉड का क्या है इंटरनेशनल कनेक्शन, ऑपरेशन में बड़े खुलासे

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Operation Cyber Mukti:  कोटपूतली-बहरोड़ पुलिस ने ‘ऑपरेशन साइबर मुक्ति’ के तहत कम्बोडिया से संचालित एक बड़े चीनी साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया। उप महानिरीक्षक देवेन्द्र कुमार बिश्नोई की अगुवाई में 15 थानों की 25+ टीमें और 100 से अधिक पुलिसकर्मी शामिल थे। मुख्य दलाल सुरेश सेन (रामनगर, बानसूर) समेत 26 संदिग्ध गिरफ्तार किए गए। गिरोह युवकों को कम्बोडिया भेजकर 15 दिनों तक साइबर फ्रॉड का प्रशिक्षण देता और डिजिटल अरेस्ट, नकली ट्रेडिंग ऐप व सोशल मीडिया के जरिए ठगी करता था। पुलिस ने जनता को सतर्क रहने और धोखाधड़ी की रिपोर्ट करने की अपील की है।

Operation Cyber Mukti:राजस्थान में साइबर फ्रॉड के लिए ट्रेनिंग कंबोडिया  में, हजारों करोड़ की ठगी का खुलासा - Operation Cyber Mukti: Cambodian Cyber  Gang Busted, 26 Arrested In Multi ...

कोटपूतली-बहरोड़ जिला पुलिस ने ‘ऑपरेशन साइबर मुक्ति’ के तहत कम्बोडिया से संचालित एक बड़े चीनी साइबर गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस अभियान का नेतृत्व उप महानिरीक्षक पुलिस सह-जिला पुलिस अधीक्षक देवेन्द्र कुमार बिश्नोई ने किया। कार्रवाई में 15 थानों की 25 से अधिक टीमें और 100 से अधिक पुलिसकर्मी शामिल थे। कार्यवाही में  मुख्य दलाल सुरेश सेन (रामनगर, बानसूर) सहित कुल 26 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। इनमें से 15 संदिग्धों से गहन पूछताछ की गई, जिससे गिरोह की कार्यप्रणाली का पूरा नेटवर्क सामने आया। जांच में पता चला कि गिरोह भारतीय नागरिकों को अपना शिकार बनाने के लिए विशेष रणनीतियों का इस्तेमाल करता था।

कम्बोडिया में 15 दिनों तक साइबर फ्रॉड की स्क्रिप्ट पर प्रशिक्षण
सुरेश सेन जैसे दलाल युवकों को वियतनाम और थाईलैंड के रास्ते कम्बोडिया भेजते थे। अकेले बानसूर क्षेत्र से 50 से अधिक युवकों को भेजा गया। कम्बोडिया में इन्हें 15 दिनों तक साइबर फ्रॉड की स्क्रिप्ट पर प्रशिक्षण दिया जाता था। गिरोह द्वारा किए जाने वाले अपराधों में डिजिटल अरेस्ट प्रमुख था, जिसमें खुद को सीबीआई, पुलिस, ईडी या कस्टम अधिकारी बताकर लोगों को डराया जाता था। इसके अलावा फेक ट्रेडिंग ऐप और नकली वेबसाइट के जरिए निवेश के नाम पर ठगी की जाती थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे टेलीग्राम, व्हाट्सएप्प और इंस्टाग्राम के विज्ञापनों के जरिए भी लोगों को शिकार बनाया जाता था।

कम्बोडिया के फर्जी कॉल सेंटरों में भारत, पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश के लड़के

जांच में यह भी पता चला कि कम्बोडिया के फर्जी कॉल सेंटरों में भारत, पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश के लगभग 1000-1500 लोग काम कर रहे थे। उन्हें 10000 रुपए मासिक वेतन के साथ अतिरिक्त इंसेंटिव भी मिलता था। पुलिस ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और आर्थिक लेन-देन की जांच अभी जारी है। साइबर सेल प्रभारी संदीप कुमार यादव ने इस कार्रवाई में विशेष योगदान दिया।

पुलिस विभाग ने इन देशों के लिए जारी की एडवाइजरी

पुलिस ने आमजन को सतर्क रहने के लिए कई सुझाव दिए हैं। विदेश में नौकरी दिलाने वाले एजेंट, कंपनी ऑफर लेटर और वर्क परमिट की अनिवार्य जांच करें। कम्बोडिया, लाओस, वियतनाम और म्यांमार जाने वाले युवा विशेष सावधानी बरतें। किसी भी साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या नजदीकी थाने में रिपोर्ट करें। साथ ही बिना लाइसेंसी एजेंट के माध्यम से विदेश जाने से बचने की सलाह दी गई।

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