किसान नेताओं का कहना है कि सरकार उनकी आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है। उनका तर्क है कि लोकतांत्रिक तरीके से मुख्यमंत्री से सवाल पूछना उनका हक है, लेकिन पुलिसिया कार्रवाई ने उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन किया है।

सुनाम के लोंगोवाल में रविवार देर रात उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब पुलिस ने लोंगोवाल थाने के समक्ष धरना दे रहे किसानों को जबरन खदेड़ दिया। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने भारतीय किसान यूनियन (एकता आजाद) के कई मुख्य नेताओं को हिरासत में ले लिया है।
किसान मजदूर मोर्चा के आह्वान पर भारतीय किसान यूनियन (एकता आज़ाद) के नेतृत्व में किसानों का एक बड़ा काफिला रविवार को मजीठा जाने के लिए निकला था। इन किसानों का मुख्य उद्देश्य मुख्यमंत्री भगवंत मान से मिलकर अपनी मांगों को लेकर सवाल पूछना था। जैसे ही किसानों का काफिला लोंगोवाल से आगे बढ़ने लगा, भारी पुलिस बल ने उन्हें रास्ते में ही रोक लिया। रोके जाने से गुस्साए किसान वापस लौटे और लोंगोवाल पुलिस थाने के मुख्य द्वार के सामने धरने पर बैठ गए। किसानों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
विरोध प्रदर्शन के बीच रात के समय पुलिस ने धरने को खत्म करवाने की कवायद शुरू की। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए किसानों को वहां से खदेड़ दिया। इस दौरान अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया।
पुलिस ने आंदोलन का नेतृत्व कर रहे कई चेहरों को हिरासत में लिया है, जिनमें जसविंदर सिंह लोंगोवाल, जसवीर सिंह मेदेवास, दिलबाग सिंह हरिगढ़ आदि शामिल हैं।