डिंडौरी जिले के अमरपुर स्थित संदीपनी स्कूल में छात्राओं से अशोभनीय चैट करने और उन पर मिलने का दबाव बनाने के आरोप में फरार चल रहे शिक्षक को आखिरकार पुलिस ने सागर जिले के देवरी गांव से गिरफ्तार कर लिया। इस गिरफ्तारी से क्षेत्र में राहत और सुरक्षा की भावना गहरी हुई है।![]()
स्थानीय विरोध के बाद तेज हुई जांच
घटना सामने आने के बाद अमरपुर में अभिभावकों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त था। स्थानीय व्यवसायियों ने आरोपी शिक्षक की गिरफ्तारी की मांग करते हुए अपनी दुकानें स्वेच्छा से बंद रखीं और विरोध प्रदर्शन किया। बढ़ते जनदबाव के मद्देनज़र पुलिस ने जांच तेज की और आरोपी को एक स्थान से दूसरे स्थान पर छिपते हुए ट्रैक कर देवरी से पकड़ लिया।
आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
छात्राओं की शिकायत पर कार्रवाई
पुलिस के अनुसार, स्कूल की कई छात्राओं ने शिक्षक पर अशोभनीय चैट भेजने, अनचाहे संदेश भेजकर मानसिक दबाव बनाने और मिलने के लिए मजबूर करने की शिकायत दर्ज कराई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक वाहिनी सिंह ने विशेष टीम गठित कर तुरंत कार्रवाई के आदेश दिए।
ग्रामीणों और व्यापारियों ने पुलिस की तत्परता की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई बच्चों के मनोबल और सुरक्षा दोनों के लिए ज़रूरी है।
गिरफ्तारी से अमरपुर में राहत
जैसे ही आरोपी की गिरफ्तारी की खबर अमरपुर पहुंची, अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों ने राहत महसूस की। कई अभिभावकों का मानना है कि समय रहते कार्रवाई न होती तो बच्चियों पर इसका भावनात्मक असर और गहरा हो सकता था। साथ ही यह मांग भी उठी कि ऐसे मामलों में स्कूल प्रबंधन की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
“शिक्षक समाज की रीढ़, ऐसे मामले विश्वास तोड़ते हैं”
स्थानीय लोगों ने कहा कि एक शिक्षक का चरित्र छात्रों के भविष्य पर सीधे प्रभाव डालता है। ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई ज़रूरी है, ताकि अन्य संस्थानों के लिए भी यह चेतावनी बन सके।
आगे की जांच जारी, डिजिटल सबूत खंगाले जा रहे
पुलिस ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी रहेगी और मोबाइल तथा डिजिटल चैट रिकॉर्ड जैसे सभी तकनीकी साक्ष्यों की जांच की जाएगी। फिलहाल आरोपी जेल में है और पूर्ण जांच के बाद केस का चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा।
साथ ही स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि छात्राओं को मनोवैज्ञानिक परामर्श भी उपलब्ध कराया जाए, जिससे वे जल्द सामान्य जीवन में लौट सकें।