छिंदवाड़ा जिले के परासिया ब्लॉक अंतर्गत सिविल अस्पताल चांदामेटा में चिकित्सा लापरवाही का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि प्रसव के दौरान डॉक्टर और स्टाफ की गंभीर गलती से महिला के पेट के भीतर कपड़ा रह गया, जिसकी वजह से तेज संक्रमण फैल गया और उसकी तबीयत अचानक खराब हो गई।
डिस्चार्ज के कुछ घंटे बाद बिगड़ी हालत
ग्राम इटावा निवासी देविका साहू (26) को प्रसव पीड़ा के बाद 17 नवंबर को अस्पताल में भर्ती किया गया था। 18 नवंबर की रात 12:02 बजे उसने एक बच्ची को जन्म दिया। 20 नवंबर को जच्चा-बच्चा को छुट्टी दे दी गई।
परिवार के अनुसार अस्पताल से घर पहुंचने के कुछ ही घंटों बाद देविका को तेज पेट दर्द, बुखार, मुंह में सूजन और अत्यधिक कमजोरी महसूस होने लगी। हालात लगातार बिगड़ते देख परिजन उसे तुरंत छिंदवाड़ा के एक निजी नर्सिंग होम ले गए।
निजी अस्पताल की जांच में हुई बड़ी लापरवाही सामने
नर्सिंग होम के डॉक्टरों ने जांच के दौरान पाया कि प्रसूति प्रक्रिया के समय महिला के पेट में कपड़ा छोड़ दिया गया था। डॉक्टरों का कहना है कि कपड़ा अंदर रह जाने से जबरदस्त इंफेक्शन फैल गया, जो समय पर उपचार न मिलने पर जानलेवा साबित हो सकता था।
CM हेल्पलाइन 181 में दर्ज कराई शिकायत
गंभीर लापरवाही से आहत परिवार ने 23 नवंबर को सीएम हेल्पलाइन 181 पर शिकायत दर्ज कराई। फिलहाल देविका का उपचार निजी अस्पताल में जारी है और उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है।
परिजन दोषी डॉक्टरों व नर्सिंग स्टाफ के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।