- हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक जिन लोग का सोने से पहले ज्यादा स्क्रीन टाइम अधिक होता है उनमें नींद से जुड़ी बीमारियां, मोटापा, हृदय रोग और डिप्रेशन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

हमारी लाइफस्टाइल की जिन आदतों के कारण सेहत पर सबसे ज्यादा असर हो रहा है उनमें से एक है मोबाइल से चिपके रहना। क्या आप जानते हैं कि हर व्यक्ति रोजाना लगभग 3 घंटे से ज्यादा समय मोबाइल स्क्रीन पर बिताता है और इसमें सबसे बड़ा हिस्सा देर रात के स्क्रॉलिंग का होता है? सोचिए, जब नींद का समय शरीर को रिपेयर करने और दिमाग को आराम देने के लिए बनाया गया है, हम उसी समय इंस्टाग्राम रील्स, व्हाट्सऐप चैट या यूट्यूब वीडियो में उलझे रहते हैं।
यह आदत देखने में साधारण लग सकती है, लेकिन शोध बताते हैं कि देर रात फोन का इस्तेमाल नींद, आंखों, दिमाग, हार्मोन और पूरे स्वास्थ्य को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है।
जब हम रात में फोन की स्क्रीन देखते हैं तो उससे निकलने वाली ब्लू लाइट हमारे शरीर को कई प्रकार से नुकसान पहुंचाने लगती है। इसका असर मेलाटोनिन नामक हार्मोन पर भी होता है जो नींद लाने में मदद करता है। इसके चलते नींद देर से आती है, बार-बार टूटती है और सुबह उठते ही शरीर थका-थका महसूस करता है। यही नहीं, लगातार स्क्रॉलिंग करते रहने से आंखों पर दबाव बढ़ता है और मानसिक रूप से भी हम बेचैनी, तनाव और चिंता का शिकार हो जाते हैं।

स्क्रीन टाइम बढ़ने के नुकसान
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक जिन लोग का सोने से पहले ज्यादा स्क्रीन टाइम अधिक होता है उनमें नींद से जुड़ी बीमारियां, मोटापा, हृदय रोग और डिप्रेशन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यानी रात की यह आदत केवल नींद को बाधित नहीं करती, बल्कि धीरे-धीरे हमारी उम्र और सेहत दोनों घटाती है।

नींद की गुणवत्ता पर असर
जब आप रात में फोन स्क्रॉल करते हैं, तो स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट दिमाग में मेलाटोनिन हार्मोन को दबा देती है। मेलाटोनिन ही वह हार्मोन है जो हमारे शरीर को सोने का संकेत देता है।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ स्लीप मेडिसिन के अनुसार, सोने से 1-2 घंटे पहले फोन का इस्तेमाल करने से नींद आने में देरी होती है और गहरी नींद नहीं आती। लगातार ऐसा करने से अनिद्रा की समस्या बढ़ सकती है। अच्छी नींद न मिलने का सीधा असर दिनभर की ऊर्जा, मूड और कार्यक्षमता पर पड़ता है।

आंखों पर दबाव का खतरा
फोन से निकलने वाली ब्लू लाइट आंखों के लिए हानिकारक मानी जाती है। शोध बताते हैं कि लगातार देर रात तक स्क्रीन देखने से डिजिटल आई स्ट्रेन हो सकता है। इसके कारण आंखों में जलन, सूखापन, धुंधला दिखाई देना और सिरदर्द की दिक्कत बढ़ जाती है।
अगर यह आदत लंबे समय तक जारी रहे तो रेटिना की कोशिकाएं प्रभावित हो सकती हैं, जिससे उम्र से पहले मैक्युलर डीजेनरेशन यानी दृष्टि कमजोर होना शुरू हो सकता है।

मोटापा बढ़ने का भी जोखिम
जब आप देर रात तक फोन का इस्तेमाल करते हैं तो सोने का समय कम हो जाता है। नींद की कमी का सीधा असर हार्मोनल बैलेंस पर पड़ता है। अध्ययनों के अनुसार, नींद की कमी से घ्रेलिन हार्मोन (भूख बढ़ाने वाला हार्मोन) बढ़ जाता है और लेप्टिन हार्मोन (पेट भरा होने का संकेत देने वाला) कम हो जाता है। इस वजह से देर रात तक फोन चलाने वाले लोग अगले दिन ज्यादा कैलोरी खाते हैं और धीरे-धीरे वजन बढ़ने लगता है।
हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की एक स्टडी के मुताबिक, रात में नींद की कमी और स्क्रीन टाइम मोटापे, डायबिटीज और मेटाबॉलिक सिंड्रोम का बड़ा कारण है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।