China: रोबोट भेड़िए, दुनिया को निशाना बनाने में सक्षम परमाणु मिसाइल; चीन की परेड में दिखे कौन से घातक हथियार?

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द्वितीय विश्व युद्ध में चीन की जापान पर विजय के 80 साल के जश्न के दौरान ड्रैगन की तरफ से किन-किन हथियारों को दुनिया के सामने लाया गया? इनमें सबसे घातक हथियार कौन से रहे? इनकी खासियतों को लेकर क्या दावा किया जा रहा है? साथ ही विशेषज्ञों का चीन के इस शक्ति प्रदर्शन पर क्या कहना है? आइये जानते हैं|

विस्तार

चीन में बुधवार को द्वितीय विश्व युद्ध से जुड़े एक समारोह पर पूरी दुनिया की निगाहें रहीं। यह कार्यक्रम न सिर्फ चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग-उन समेत दुनिया के कई नेताओं के एक मंच पर आने का गवाह बना, बल्कि इस दौरान ड्रैगन ने अपने एक से एक उन्नत हथियारों का प्रदर्शन भी किया। चीन ने अपनी बाकी परेड्स के मुकाबले इस परेड में जिन हथियारों को दिखाया, उसने दुनिया को भी चौंका दिया है। बताया गया है कि चीन की सेना की यह परेड उसके इतिहास की सबसे बड़ी परेड थी।

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर द्वितीय विश्व युद्ध में चीन की जापान पर विजय के 80 साल के जश्न के दौरान ड्रैगन की तरफ से किन-किन हथियारों को दुनिया के सामने लाया गया? इनमें सबसे घातक हथियार कौन से रहे? इनकी खासियतों को लेकर क्या दावा किया जा रहा है? साथ ही विशेषज्ञों का चीन के इस शक्ति प्रदर्शन पर क्या कहना है?

पहले जानें- चीन ने किन हथियारों को दुनिया के सामने पेश किया?
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने तियानमेन स्क्वायर पर सैन्य परेड में 50 हजार लोगों की भीड़ और मीडिया के सामने देश की सेनाओं को सलामी दी। इसके बाद हथियारों का प्रदर्शन किया गया। जिन खास हथियारों को दिखाया गया, उनमें रोबोटिक भेड़ियों से लेकर परमाणु बैलिस्टिक मिसाइलें, लेजर हथियार और ड्रोन्स की नई रेंज शामिल रहे। इसके अलावा लड़ाकू विमान, अंतरिक्ष से जुड़ी रक्षा प्रणालियां भी चीन की प्रदर्शनी का अहम हिस्सा रहे।

परेड की शुरुआत एक 80 बंदूकों वाली तोप की सलामी से हुई, जिसके जरिए चीन की जापान विजय के 80 वर्षों को दर्शाया गया। इसके बाद बड़ी संख्या में हेलीकॉप्टर और फाइटर जेट्स ने कालाबाजियां दिखाईं। वहीं, 80 हजार सफेद कबूतरों और रंगीन गुब्बारों को भी उड़ाया गया। इस परेड के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि दुनिया को शांति और युद्ध के बीच में चुनना होगा।

कौन से नए और घातक हथियारों को दुनिया के सामने पेश किया गया?

1. सुपरसॉनिक मिसाइलों की खतरनाक रेंज
चीन की सेना ने अपनी नई वाईजे-15 हाइपरसॉनिक मिसाइलों को दुनिया के सामने रखा। इसके अलावा उसने इस मिसाइल के पुराने सुपरसॉनिक वर्जन वाईजे-17, वाईजे-19 और वाईजे-20 को भी परेड में दिखाया। वाईजे मिसाइल, जिनका पूरा नाम यिंग जी यानी ‘बाज का हमला’ है, को किसी भी जहाज या एयरक्राफ्ट से दागा जा सकता है। इसमें बड़े से बड़े जहाज को भारी नुकसान पहुंचाने की क्षमता होने का दावा किया जाता है।

गौरतलब है कि चीन काफी समय से अपनी हाइपरसॉनिक (आवाज की गति से पांच गुना तेज) मिसाइलों की तकनीक को बेहतर बनाने की कोशिश में जुटा है, खासकर ऐसे समय में जब दुनियाभर के रडार सिस्टम खुद को अपग्रेड करने में जुटे हैं। हालांकि, पारंपरिक रक्षा प्रणालियां अभी भी सुपरसॉनिक सिस्टम के सामने कमजोर साबित होती हैं। यहीं चीन अपने आप को और मजबूत करने की कोशिश में है।

Photo: CCTV

इसी तरह चीन ने वाईजे-21 एंटी शिप बैलिस्टिक मिसाइल का भी प्रदर्शन किया। अमेरिकी मीडिया ग्रुप ब्लूमबर्ग के मुताबिक, इस मिसाइल को कैरियर किलर (विमानवाहक जहाजों का ध्वसंक) भी कहा जाता है और इसे एयरक्राफ्ट से लॉन्च किया जा सकता है। वाईजे-21 सुपरसॉनिक मिसाइल है और इसकी रेंज करीब 600 किलोमीटर तक मानी जाती है।

इसके अलावा वाहनों पर ले जाए जा सकने वाली सीजे-1000 सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल, शिप से लॉन्च की जा सकने वाली वाईजे-18सी क्रूज मिसाइल को भी दिखाया गया।

The new CJ-1000 long-range hypersonic cruise missile is believed to have a range of several thousand kilometres. Photo: CCTV

2. समुद्री ड्रोन्स
चीन ने दो नई तरह के पानी में काम करने वाले मानवरहित ड्रोन्स को भी दुनिया के सामने पेश किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, समुद्री ड्रोन- एजेएक्स002 करीब 60 फीट लंबा है। तारपीडो के आकार का यह ड्रोन पंप जेट प्रोपल्शन सिस्टम पर काम करता है। यानी चीन ने इस अंटरवॉटर ड्रोन को रडार की पकड़ में न आने की तकनीक पर बनाया है। बता दें कि चीन पहले ही दुनिया का सबसे बड़ा समुद्री ड्रोन्स का कार्यक्रम चला रहा है। उसके पास पानी में पांच अलग-अलग तरह के ड्रोन्स पहले से मौजूद हैं।

विश्लेषकों की मानें तो यह समुद्री ड्रोन छोटी सबमरीन की तरह हैं, जिनमें संचालन के लिए इंसानों की जरूरत नहीं है। इन्हें समुद्र में किसी भी देश के युद्धपोत (एयरक्राफ्ट कैरियर, डेस्ट्रॉयर, अन्य पोत) को नष्ट करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

3. दुनिया के हर कोने में मार करने में सक्षम परमाणु क्षमता वाली आईसीबीएम
चीन ने परमाणु क्षमता वाली अंतरद्वीपीय मिसाइलों का भी प्रदर्शन किया। इनमें तीन मिसाइलें- दॉन्ग फेंग-61, दॉन्ग फेंग-31बीजे और दॉन्ग फेंग 5सी को पहली बार दुनिया के सामने लाया गया।  इसके अलावा चीनी सेना ने अपनी पहली हवा से लॉन्च हो सकने वाली परमाणु मिसाइल जेएल-1 को भी दुनिया के सामने रखा। चीनी मीडिया ग्रुप सीसीटीवी के मुताबिक, जेएल-1, जेएल-3 के साथ डीएफ-61 और डीएफ-31 चीन की थलसेना, नौसेना और वायुसेना में इस्तेमाल की जा सकने वाली मिसाइलों के ट्रायड का पहला पूर्ण प्रदर्शन रहा।

The DF-61 intercontinental ballistic missile and the JL-3 submarine-launched ballistic missile. Photo: CCTV

चीन के ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, दॉन्ग फेंग 5सी (डीएफ-5सी) परमाणु मिसाइल की मारक क्षमता 20 हजार किलोमीटर से भी ज्यादा की है और इसमें दुश्मन की रक्षा प्रणालियों को ज्यादा सटीकता से भेदने की क्षमता मौजूद है। डीएफ-5सी की लंबी दूरी तक मार करने की काबिलियत की वजह से यह दुनिया के किसी भी देश को निशाना बनाने में सक्षम बताई जाती है। वह भी परमाणु क्षमता के साथ। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, एक डीएफ-5सी मिसाइल अपने साथ 12 परमाणु वॉरहेड ले जा सकती है।

Military parade to mark the 80th anniversary of the end of World War Two, in Beijing

इसके अलावा परेड में जो अन्य चीनी मिसाइलें पेश की गईं, उनमें पहले सामने आईं कुछ मिसाइलें, जैसे- चांगजियान-20ए, यिंगजी-18सी, चांगजियान-1000 शामिल रहीं। इसके अलावा दॉन्ग फेंग-17 और दॉन्ग फेंग-26डी हाइपरसॉनिक मिसाइलें भी परेड का हिस्सा रहीं। यह सभी मिसाइलें हर मौसम में वार करने की क्षमता रखती हैं।

चीन ने परेड में अपनी एक खास जेएल-3 मिसाइल की झलक भी दिखाई। दावा किया गया है कि यह तीसरी पीढ़ी की अंतरद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे समुद्र के भीतर से पनडुब्बी के जरिए लॉन्च किया जा सकता है। पीएलए इसे अपने परमाणु कार्यक्रम का अहम हिस्सा मान रही है।

4. अंतरिक्ष रक्षा प्रणाली
एक तरफ जहां अमेरिका अपने अंतरिक्ष रक्षाबल के गठन की कोशिशों को आगे बढ़ा रहा है, तो वहीं चीन ने अंतरिक्ष से जुड़े खतरों से निपटने के लिए अंतरिक्ष रक्षा प्रणाली को सामने भी रख दिया। बताया गया है कि चीन ने पहली बार परेड में एचक्यू-29 स्पेस डिफेंस सिस्टम सामने रखा है, जो कि न सिर्फ अंतरिक्ष से लॉन्च होने वाले हमलों से रक्षा कर सकता है, बल्कि विदेशी सैटेलाइट्स को निशाना भी बना सकता है।

फिलहाल चीन की तरफ से एचक्यू-29 की क्षमताओं को लेकर कोई खुलासा नहीं किया गया है, हालांकि इसके बड़े आकार को देखकर अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह अमेरिकी नौसेना के एसएम-3 ब्लॉक 11ए डिफेंस सिस्टम की तरह ही होगा, जिसकी लंबी दूरी तक मारक क्षमता अंतरिक्ष से आने वाले खतरों से निपटने में सक्षम है और इसे जमीन या पोत से भी लॉन्च किया जा सकता है। साथ ही यह बड़े पोत और बैलिस्टिक मिसाइलों को खत्म करने में भी सक्षम है।

The HQ-29 is thought to be designed to counter ballistic missiles during midcourse flight. Photo: CCTV

5. लेजर हथियार
चीनी सेना ने पोत आधारित ऊर्जा केंद्रित लेजर हथियारों के दो स्वरूपों को भी परेड में दिखाया। इनमें से एक को नौसैन्य हवाई रक्षा सिस्टम के तौर पर लगाया जाना है। वहीं, दूसरे को एक ट्रक पर लगाया दिखाया गया, जिससे संकेत मिलते हैं कि यह थलसेना की सुरक्षा में काम आएगा।

गौरतलब है कि चीन लंबे समय से ऊर्जा आधारित हथियार बनाने की कोशिश में जुटा है, जो कि पारंपरिक मिसाइलों, ड्रोन हमलों से निपटने में काम आएगा। साथ ही यह तकनीक कीमत के लिहाज से भी उपयुक्त है, खासकर मिसाइल आधारित रक्षा प्रणाली की तुलना में।

परेड में ड्रोन-रोधी तकनीक का भी प्रदर्शन किया गया। इसमें एक कंधे पर रखकर मिसाइल लॉन्च करने वाली बंदूक, उच्च ऊर्जा वाले लेजर हथियार और उच्च-क्षमता वाले माइक्रोवेव हथियार शामिल हैं।

6. लड़ाकू विमान और ड्रोन्स
परेड में चीन की थलसेना ने जमीन पर तो वायुसेना ने आसमान में अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। इस दौरान लड़ाकू विमानों की कई स्क्वॉड्रन को दर्शाया गया। मुख्य विमानों में जे-20, जे-20ए, जे-20एस और जे-35ए शामिल रहे। इसके अलावा पीएलए के जे-35 भी परेड में उड़ान भरते दिखे। यह पहली बार है, जब इन चौथी और पांचवीं पीढ़ी के पांच लड़ाकू विमानों को एक साथ परेड में उड़ान भरते देखा गया। जहां जे-20एस दुनिया का पहला दो सीट वाला स्टेल्थ क्षमता का विमान कहा जाता है, वहीं जे-35 नौसेना का पहला रडार से बचने में सक्षम लड़ाकू विमान माना जाता है।

चीन ने परेड में अपने ड्रोन्स के बेड़ों का भी प्रदर्शन किया। हालांकि, जिस एक ड्रोन ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है, उनमें जीजे-11 सबसे अहम है। यह लड़ाकू विमान जैसा दिखने वाला एक मानवरहित एयरक्राफ्ट है, जो कि अपने निगरानी अभियानों और सटीक निशानों की वजह से चर्चा में है। इसमें हथियारों को रखने के लिए अंदर ही एक टर्मिनल भी दिया गया है। चीनी मीडिया ने इस ड्रोन का जिक्र ‘लॉयल विंगमेन’ के तौर पर किया। यानी इन्हें क्रू वाले एयरक्राफ्ट (मुख्यतः) लड़ाकू विमानों के साथ ही हवाई संघर्ष में दुश्मन के खिलाफ उतारा जा सकता है।

7. रोबोटिक भेड़िए
एक तरफ जहां अमेरिका, भारत इस वक्त अपने रोबोटिक कुत्ते को मजबूत बनाने के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं, वहीं चीन ने कुछ इसी तरह चार पैरों पर चलने वाले रोबोटिक भेड़िए परेड में दर्शाए हैं। चीनी मीडिया का दावा है कि यह मशीनें सीमाई और संघर्ष के क्षेत्रों में न सिर्फ निगरानी कर सकती हैं, बल्कि लक्ष्यों पर निशाना भी साध सकती हैं। इसके अलावा यह रोबोटिक भेड़िए जरूरत पड़ने पर सैनिकों को जरूरी साजो-सामान पहुंचा सकते हैं।

इतना ही नहीं युद्धक्षेत्र में सैनिकों के घायल होने पर इन रोबोट भेड़ियों को जंग में उतारने लायक मजबूत बनाने की बात कही गई है।

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Author: ILMA NEWSINDIA

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