Bareilly News: साइबर ठगों को बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़, चार गिरफ्तार

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Seven Accused Arrested For Use To Provide Bank Accounts To Cyber Thugs In  Bareilly - Amar Ujala Hindi News Live - Bareilly News:दूसरे राज्यों के साइबर  ठगों को ठेके पर दिलाते थे

बरेली। देश भर में साइबर ठगों को ठगी के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए प्रेमनगर थाना पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। उनके पास से 100 से ज्यादा बैंक खाते मिले हैं। इनमें देश के अलग-अलग हिस्सों से करोड़ों रुपये का लेनदेन हुआ है। आठ जाली आधार कार्ड, कई मोबाइल फोन और तीन बाइकें भी बरामद की गई हैं। आरोपियों ने पूछताछ में अपने तीन अन्य साथियों के नाम भी पुलिस को बताए हैं। उनकी तलाश की जा रही है।

गिरोह का खुलासा करते हुए एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर कई राज्यों से दर्ज साइबर ठगी की शिकायतों में बैंक खाते और मोबाइल नंबर बरेली से जुड़े पाए गए थे। इसके आधार पर आरोपियों की तलाश में पुलिस और साइबर क्राइम सेल को लगाया गया था।

मंगलवार रात आठ बजे पुलिस और साइबर क्राइम सेल की टीम ने धोबीपुर चौराहा से डीडीपुरम की ओर जाने वाली बंद पड़ी रेल लाइन के पास से चार संदिग्धों को हिरासत में लिया। पूछताछ में उन्होंने अपने नाम इज्जतनगर थाना क्षेत्र के परतापुर चौधरी निवासी मुशर्रफ, किला थाना क्षेत्र के चौधरी तालाब निवासी अब्दुल रज्जाक, शिवम गोस्वामी और सीबीगंज थाना क्षेत्र के जौहरपुर निवासी निशांत श्रीवास्तव बताए।

तलाशी में संदिग्धों के पास से कई बैंक पासबुक, बैंक में रुपये जमा करने की रसीदें, एक ही नंबर के जाली आधार कार्ड मिले। सख्ती से पूछताछ करने पर आरोपियों ने साइबर ठगों और हवाला कारोबारियों को बैंक खाते उपलब्ध कराने की बात स्वीकार की। यह भी बताया कि बैंक खाते उपलब्ध कराने के बदले उनको मोटा कमीशन मिलता था।

उन्होंने बताया कि चौधरी तालाब निवासी हामिद, प्रेमनगर थाना क्षेत्र के बानखाना निवासी मोहित और बदायूं निवासी जीशान भी उनके गिरोह में शामिल है। एसपी सिटी ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। अब तक देश के कई राज्यों से करोड़ों की ठगी सामने आ चुकी है।

लालच देकर ठेला-खोमचा वालों और गरीबों के खुलवाते थे बैंक खाते
गिरोह के सरगना मुशर्रफ ने पूछताछ में बताया कि वह उत्तराखंड की एक फैक्टरी में काम करता था। वहां उसकी मुलाकात कुछ लोगों से हुई। उन्होंने कहा कि अगर कुछ बैंक खाते उपलब्ध कराओ तो कमीशन के रूप में मोटा मुनाफा हो सकता है। इसके बाद बरेली आकर उसने गिरोह तैयार किया। अब्दुल, निशांत, शिवम, हामिद, मोहित जीशान के जरिये वह ठेला-खोमचा वालों को लालच देकर बैंक में उनके खाते खुलवाते थे। पूरी डिटेल, एटीएम, यूपीआई आदि अपने पास रखते थे। साइबर ठगी और हवाला के जरिये इन खातों में जो रुपये आते थे वह रुपये निकालने के बाद दूसरे खातों में जमा कर दिया करते थे। इसके बदले उनको कमीशन मिलता था। अगर किसी मामले का खुलासा होता था तो वह साफ बच जाते थे, क्योंकि बैंक खाते से उनका कोई सरोकार नहीं होता था।