Pawan Singh: एक करोड़ से फिल्म बनाई, मुनाफा कमाया, हिस्सा नहीं दिया; पवन सिंह सहित चार के खिलाफ एफआईआर

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Shikha Bhardwaj

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वाराणसी। भोजपुरी गायक और अभिनेता पवन सिंह समेत चार लोगों के खिलाफ वाराणसी में धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। होटल कारोबारी विशाल सिंह की ओर से दाखिल किए गए आवेदन पर सीजेएम कोर्ट के आदेश पर कैंट थाने में यह केस दर्ज हुआ।

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क्या है मामला

नदेसर निवासी कारोबारी विशाल सिंह का आरोप है कि 2017 में उनकी पहचान पुणे के प्रेमशंकर राय और उनकी पत्नी सीमा राय से हुई। दंपती ने उन्हें फिल्म निर्माण में निवेश कर मुनाफा कमाने का प्रस्ताव दिया और आश्वस्त किया कि भोजपुरी स्टार पवन सिंह को फिल्म में लिया जाएगा। साथ ही खर्च की राशि सरकार से सब्सिडी के रूप में वापस मिलने का भी दावा किया गया।

मई 2018 में नदेसर स्थित एक कार्यालय में विशाल सिंह की मुलाकात पवन सिंह से कराई गई। इसके बाद निवेश का दबाव बनाते हुए उनकी कंपनी श्रेयस फिल्म प्राइवेट लिमिटेड के खाते में किस्तों में 32.60 लाख रुपये जमा कराए गए।

आरोप

  • फिल्म की शूटिंग नवंबर 2018 में शुरू हुई।

  • इस दौरान आरोपियों ने एक समझौते का कूटरचित दस्तावेज तैयार किया, जिसमें मुनाफे का बंटवारा तय किया गया – 50% निर्माता, 25% सह-निर्माता, 20% अभिनेता और 5% निर्देशक को।

  • लेकिन फिल्म पूरी होने के बाद निवेशक को हिस्सेदारी नहीं दी गई और कथित रूप से 1.13 करोड़ रुपये का गबन कर लिया गया।

सीजेएम मनीष कुमार के आदेश पर पवन सिंह, फिल्म निर्माता अरविंद चौबे, प्रेमशंकर राय और सीमा राय के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की विवेचना इंस्पेक्टर सत्यप्रकाश को सौंपी गई है।

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Author: Shikha Bhardwaj

सबसे ज्यादा पड़ गई

संजय भाटिया ने लोकसभा चुनाव में रचा था इतिहास संजय भाटिया कुरुक्षेत्र विश्वविद्याल ग्रेजुएट हैं। इनका जन्म हरियाणा के पानीपत जिले में हुआ है। वह भाजपा के महामंत्री भी रह चुके हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी संजय भाटिया ने अपने पहले ही लोकसभा चुनाव में इतिहास रच दिया था। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को 6.54 लाख मतों के अंतर से मात दी थी। संजय भाटिया ने प्रदेश के 53 साल के इतिहास में सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी। उन्हें कुल 909432 वोट मिले थे। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी कुलदीप शर्मा को 654269 वोटों के अंतर से हराया था। राहुल गांधी ने दिया था कर्मवीर के नाम का सुझाव वहीं कर्मवीर सिंह बौद्ध किसी भी गुट या खेमे से जुड़े हुए नेता नहीं माने जाते। यही कारण है कि उन्हें संगठन के भीतर एक संतुलित और सर्व स्वीकार्य चेहरे के रूप में देखा जा रहा है। वे ‘संविधान बचाओ अभियान’ में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं और जमीनी स्तर पर पार्टी के कार्यक्रमों में भागीदारी निभाते रहे हैं। एससी समुदाय से आने वाले कर्मवीर सिंह बौद्ध सामाजिक संतुलन के नजरिये से भी एक अहम दावेदार है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने स्वयं उनके नाम का सुझाव दिया है। अंबाला के मुलाना विधानसभा में रहने वाले कर्मवीर सिंह प्रशासकीय अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं और लंबे समय से कांग्रेस से जुड़कर कार्य कर रहे थे। कांग्रेस ने उन्हें हिमाचल प्रदेश में एससी सेल का प्रभारी भी बनाया था। राष्ट्रीय स्तर पर वह कन्वीनर भी हैं।