CBDT: ‘अब टैक्स कानून समझना आसान, लोग जान पाएंगे अधिकार’, नए आयकर कानून पर बोले सीबीडीटी के सदस्य|

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केंद्रीय प्रत्यक्ष बोर्ड (सीबीडीटी) के सदस्य (विधान) आरएन परबत ने नए आयकर अधिनियम पर कहा कि आयकर निकाय पुरानी शब्दावली और जटिल व्याख्याओं से दूर हो गया है। अब आम करदाता अगर प्रावधानों को पढ़ेंगे, तो वह समझ पाएंगे कि उनके मामले में कानून क्या कहता है।

Now it is easy to understand tax laws, people will be able to know their rights, CBDT member on new income tax

कानूनी जटिलताओं को कम करने के लिए सरल भाषा में लिखा गया है नया आयकर अधिनियम। केंद्रीय प्रत्यक्ष बोर्ड (सीबीडीटी) के सदस्य (विधान) आरएन परबत ने यह बात कही है। उन्होंने कहा कि कानूनी चुनौतियों को खत्म करने और आम करदाताओं के लिए कर प्रावधानों को अधिक सुलभ बनाने के लिए नए आयकर अधिनियम को सरल भाषा का उपयोग करके तैयार किया गया है।

आम आदमी को अपने अधिकारों को समझने में आसानी होगी

परबत ने बताया कि आयकर निकाय पुरानी शब्दावली और जटिल व्याख्याओं से दूर हो गया है। इससे पहले आम नागरिकों के लिए कर कानूनों को समझना मुश्किल हो जाता था। उन्होंने कहा कि आम करदाता अगर प्रावधानों को पढ़ेंगे, तो वह समझ पाएंगे कि उनके मामले में कानून क्या कहता है। आम आदमी अपने अधिकारों को जान पाएंगे। वे उस कानून को समझ पाएंग जिसके तहत वह आयकर चुका रहे हैं।

सीबीडीटी ने किए बड़े बदलाव

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने बड़ा बदलाव किया है। अब नियमों और निर्देशों में जटिल कानूनी भाषा की जगह आसान और आधुनिक शब्दों का इस्तेमाल होगा। इसके साथ ही जानकारी को समझाने के लिए तालिकाओं का सहारा लिया जाएगा। सीबीडीटी के अनुसार 26 फरवरी 2026 को अधिनियम के कार्यान्वयन से पहले इस वर्ष के अंत तक सभी नए नियम और प्रपत्र तैयार हो जाएंगे।

सरकार ने जुलाई 2024 के बजट में प्रस्ताव दिया था कि आयकर अधिनियम, 1961 की समयबद्ध व्यापक समीक्षा की जाएगी ताकि अधिनियम को संक्षिप्त, सुस्पष्ट तथा पढ़ने और समझने में आसान बनाया जा सके। 13 फरवरी, 2025 को लोकसभा में आयकर विधेयक, 2025 पेश किया गया था और इसे शीघ्र ही जांच के लिए प्रवर समिति को भेज दिया गया था। प्रवर समिति ने सुझावों के साथ अपनी रिपोर्ट 21 जुलाई, 2025 को लोकसभा में पेश की। भाजपा सांसद बैजयंत पांडा की अध्यक्षता वाली 31 सदस्यीय प्रवर समिति ने विधेयक में कुछ बदलावों का सुझाव दिया था। पिछले विधेयक को वापस ले लिया गया था, लेकिन कुछ बदलावों के साथ इसे दोबारा संसद में पेश किया गया और पारित किया गया।

 

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Author: ILMA NEWSINDIA

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