बरेली के किला थाना क्षेत्र के मोहल्ला बाकरगंज में शुक्रवार सुबह मांझा बनाने की अवैध फैक्टरी में धमाका हो गया। इससे फैक्टरी मालिक और दो कारीगरों के चीथड़े उड़ गए। पतंगबाजी के लिए मजबूत मांझा बनाने के लिए गंधक, पोटाश, कांच और लोहे के बुरादे का मिश्रण तैयार करने के दौरान यह हादसा हुआ।

बरेली के बाकरगंज की संकरी गलियों में घनी आबादी के बीच में मांझे के 150 से ज्यादा अवैध फैक्टरियां संचालित हो रहीं हैं। यहां मांझा बनाने के लिए अवैध रूप से विस्फोटक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इलाके की 20 हजार से ज्यादा आबादी जाने-अनजाने बारूद के ढेर पर बैठी है।
धमाके के बाद इलाके की सभी मांझा फैक्टरियों में काम बंद कर दिया गया। वहीं, पुलिस-प्रशासन का निगरानी तंत्र नाकाम साबित हो रहा है। अधिकारियों को मांझा बनाने में विस्फोटकों के इस्तेमाल की भनक तक नहीं है।
एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि आमतौर पर देसी मांझे में कांच के बुरादे का इस्तेमाल किया जाता है। मांझा बनाने के लिए विस्फोटक का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी से इन्कार किया। फॉरेंसिक एक्सपर्ट की जांच में गंधक, पोटाश, कांच और लोहे के बुरादे मिले तो इस खेल का खुलासा हुआ।

सिलिंडर फटने की सूचना देकर गुमराह करने की कोशिश
स्थानीय लोगों के मुताबिक, सात साल पहले भी बाकरगंज से सटे कौआ टोला में मांझा बनाने वाली फैक्टरी में धमाका हुआ था। शुक्रवार को हुए धमाके के बाद पुलिस को घरेलू गैस सिलिंडर फटने की सूचना देकर गुमराह करने की कोशिश की गई। पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची तो वहां का नजारा कुछ अलग था। अतीक और फैजान के शरीर के टुकड़े बिखरे पड़े थे। एक दीवार पर कालिख के निशान के अलावा मौके पर आग लगने या सिलिंडर फटने जैसे कोई संकेत नहीं मिले।
मांझे की अवैध फैक्टरी में धमाका, मालिक और दो कारीगरों के चीथड़े उड़े
बरेली के किला थाना क्षेत्र के मोहल्ला बाकरगंज में शुक्रवार सुबह मांझा बनाने की अवैध फैक्टरी में धमाका हो गया। इससे फैक्टरी मालिक और दो कारीगरों के चीथड़े उड़ गए। पतंगबाजी के लिए मजबूत मांझा बनाने के लिए गंधक, पोटाश, कांच और लोहे के बुरादे का मिश्रण तैयार करने के दौरान यह हादसा हुआ। स्थानीय लोगों के मुताबिक, धमाके की गूंज तीन किलोमीटर दूर तक सुनी गई। फॉरेंसिक टीम ने मौके से नमूने लेकर जांच के लिए भेजे हैं। रिपोर्ट आने के बाद धमाके का राज सामने आएगा।
नहीं थी अग्निशमन विभाग की एनओसी
सीएफओ चंद्रमोहन शर्मा ने बताया कि मौके पर गए थे। वहां आग लगने जैसे संकेत नहीं मिले हैं। अवैध फैक्टरी के संचालक ने अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) भी नहीं लिया था। फैक्टरी का संचालन इतनी संकरी गली में किया जा रहा था कि वहां पर एनओसी दी ही नहीं सकती।
बाकरगंज में मांझा बनाने की फैक्टरी अवैध रूप से संचालित की जा रही थी। वहां गंधक-पोटाश का मिश्रण तैयार करने के दौरान हुए धमाके में तीन लोगों की मौत हुई है। हादसे के कारणों की जांच की जा रही है।
Author: planetnewsindia
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