कस्बा की आशा नगर मौजूद हजरद ख्वाजा सूफी हाफिज अलाउद्दीन हसन शाह बिलाली दरगाह शरीफ पर 29वें उर्स मुबारक का आगाज बुधवार को सरकारी चादर के साथ किया गया। इसी रात को मीलाद-ए-शरीफ का प्रोग्राम किया गया जिसमें कब्बालों ने बाबा की शान में कब्बालियां पेशकर मुल्क और कौम के सलामती की दुआ की।
सालाना उर्स शरीफ में सरकारी चादर के बाद रात में मीलाद-ए-शरीफ का कार्रक्रम में दूरदराज से आए मशहूर कव्वालों ने अपने कलाम सुनाकर लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। सज्जादागद्दी नशीन डा. इरशाद हसन बिलाली के आगाज में रात नौ बजे महफिले कव्वाली की शुरुआत नाते पाक से की। इस दौरान उन्होंने हजरत अली की शान में कलाम पेश कर लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद कब्बालों ने कई कलाम पेश किया कि हक निभाना मेरे हुसैन का है…..कव्वाली का कार्यक्रम सुबह पांच बजे मुनाकिव हुआ। इसमें कब्बालों ने अपने मशहूर कलाम बे खुद दिए देते हैं अंदाज ऐ हिजावा…..,वो आता होगा, पत्थर के सनम, अगर आग दिल में लगी हो तो जानो, सुनाकर हजारों लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। शाह बिलाली की इंतजामिया कमेटी द्वारा पूरे बंदोबस्त किए गए। वहीं सुरक्षा की कमान प्रभारी निरीक्षक नरेश सिंह, पूरे अमले के साथ संभाले हुए थे। उर्स में उर्स इंतजामिया कमेटी के डा0 इरफान हसन बिलाली, कल्लू मास्टर, शम्स टेलर, शाहिद, पप्पू, भाई, इकबाल, इशरतअली, बहादुर भाई, व आस मुहम्मद आदि मौजूद थे।


