जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के बाद सीजेपी कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने पर पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दिल्ली पुलिस और सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने इसे विरोध की आवाज दबाने की कोशिश बताया, हिरासत में लिए गए लोगों को वकील से बात करने देने की मांग की और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक तिरंगा फहराने का आंदोलन जारी रखने का एलान किया।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी और दिल्ली पुलिस के बीच विवाद बढ़ गया है। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपने साथियों को हिरासत में लिए जाने पर सरकार और दिल्ली पुलिस को घेरा है। मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अगर कोई जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने को कानून का उल्लंघन मानता है, तो वह देशद्रोही है। दिपके के मुताबिक, तिरंगा फहराने पर लोगों को गिरफ्तार करना समझ से परे है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस कार्रवाई के विरोध में आंदोलन और तेज किया जाएगा।
दिपके ने बताया कि उनकी टीम मंगलवार सुबह जंतर-मंतर पहुंची थी और वहां तिरंगा फहराया था। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उनके साथियों आशुतोष रांका, सौरव दास और अजिंक्य शिंदे समेत कई लोगों को हिरासत में ले लिया। दिपके ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि राष्ट्रीय ध्वज फहराना कब से अपराध हो गया? उन्होंने मांग की कि अगर तिरंगा फहराने के लिए उनके साथियों पर आरोप लगाए जाते हैं, तो इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
मीडिया से बात करते हुए सीजेपी नेता ने हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं के कानूनी अधिकारों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने उम्मीद जताई कि दिल्ली पुलिस सभी को अपने वकीलों से बात करने की अनुमति देगी। दिपके ने आरोप लगाया कि उनके साथ पहले भी ऐसा हो चुका है, जब उन्हें 24 घंटे तक वकील से बात करने की इजाजत नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा कि किसी को भी इस तरह हिरासत में लेकर उसके कानूनी अधिकारों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
दिपके ने पुलिस की कार्रवाई को तानाशाही मानसिकता का उदाहरण बताया। उनका आरोप है कि सरकार सार्वजनिक जगहों को अपनी निजी संपत्ति समझने लगी है और नहीं चाहती कि लोग जंतर-मंतर पर जाकर विरोध दर्ज कराएं। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर देश के 140 करोड़ लोगों का है और इसे विरोध की आवाज का प्रतीक माना जाना चाहिए। दिपके ने कहा, “पूरा देश जंतर-मंतर बन जाएगा। जंतर-मंतर सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि प्रतिरोध की भावना है।” उनके मुताबिक, विरोध की आवाज को इस तरह की कार्रवाई से दबाया नहीं जा सकता।
सीजेपी नेता ने साफ कहा कि उनकी पार्टी का आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी मुख्य मांग पूरी नहीं हो जाती। उन्होंने ऐलान किया कि वे जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराते रहेंगे और यह सिलसिला तब तक नहीं रुकेगा, जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं दे देते।

